ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा
>> Friday, July 31, 2009
ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा
ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा
नजाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं
हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा
सफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंज़ाम से वाकिफ़
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा
समन्दर के सफ़र में किस्मतें पहलु बदलती हैं
अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा
मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको
किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा

2 टिप्पणियाँ:
adbhut ghazal.............sabhi she'r khoob ! bahut khoob !
सफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंज़ाम से वाकिफ़
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा
ufffff इस sher को पढ़ कर दिल में nashtar chubh गया
क्या khoob लिखा है ............waaaaaaaaaaaah
वीनस केसरी
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