दिल्ली सुखनवरों का है मरकज़ मगर मियां, उर्दू के कुछ चिराग़ तो पंजाब में भी हैं - जतिन्दर परवाज़

ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा

>> Friday, July 31, 2009

ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा
ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा

नजाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं
हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा

सफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंज़ाम से वाकिफ़
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा

समन्दर के सफ़र में किस्मतें पहलु बदलती हैं
अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा

मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको
किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा

2 टिप्पणियाँ:

AlbelaKhatri.com 31 जुलाई 2009 10:19 am  

adbhut ghazal.............sabhi she'r khoob ! bahut khoob !

venus kesari 31 जुलाई 2009 12:55 pm  

सफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंज़ाम से वाकिफ़
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा

ufffff इस sher को पढ़ कर दिल में nashtar chubh गया

क्या khoob लिखा है ............waaaaaaaaaaaah

वीनस केसरी

तशरीफ लाने का शुक्रिया

free html visitor counters

  © Blogger templates Shiny by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP