दिल्ली सुखनवरों का है मरकज़ मगर मियां, उर्दू के कुछ चिराग़ तो पंजाब में भी हैं - जतिन्दर परवाज़

सूरज-चन्दा जैसे रौशन

>> Tuesday, October 06, 2009

सूरज-चन्दा जैसे रौशन
हो जाएँ दिल सब के रौशन

आप जो मेरे साथ चलेंगे
हो जाएँगे रस्ते रौशन

दिल को रौशन करने वाले
मेरा घर भी कर दे रौशन

खिड़की से कुछ जुगनू आकर
कर जाते हैं कमरे रौशन

इक दीपक के जल जाने से
दीवारो-दर सारे रौशन

चाँद सा चेहरा कब आएगा
मेरे घर को करने रौशन

1 टिप्पणियाँ:

संजीव गौतम 6 अक्तूबर 2009 9:24 pm  

दिल को रौशन करने वाले
मेरा घर भी कर दे रौशन
बहुत अच्छी और ग़ज़लियत से भरपूर ग़ज़ल है.

तशरीफ लाने का शुक्रिया

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