दिल्ली सुखनवरों का है मरकज़ मगर मियां, उर्दू के कुछ चिराग़ तो पंजाब में भी हैं - जतिन्दर परवाज़

वो नज़रों से मेरी नज़र काटता है

>> Friday, July 24, 2009

वो नज़रों से मेरी नज़र काटता है
मुहब्बत का पहला असर काटता है

मुझे घर मैं भी चैन पड़ता नही था
सफ़र में हूँ अब तो सफ़र काटता है

ये माँ की दुआएं हिफाज़त करेंगी
ये ताबीज़ सब की नज़र काटता है

ये फिरका-परसती ये नफ़रत की आंधी
पड़ोसी, पड़ोसी का सर काटता है

तुम्हारी जफा पे मैं गज़लें कहूँगा
सुना है हुनर को हुनर काटता है

10 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी 24 जुलाई 2009 2:09 am  

बहुत सुंदर !!

ओम आर्य 24 जुलाई 2009 3:31 am  

तुम्हारी जफा पे मैं गज़लें कहूँगा
सुना है हुनर को हुनर काटता है
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अदभूत शेर लिखे है आपने.......बहुत ही खुब

Udan Tashtari 24 जुलाई 2009 5:02 am  

ये माँ की दुआएं हिफाज़त करेंगी
ये ताबीज़ सब की नज़र काटता है


तुम्हारी जफा पे मैं गज़लें कहूँगा
सुना है हुनर को हुनर काटता है


--वाह!! लाजबाब!!

RAJNISH PARIHAR 24 जुलाई 2009 6:16 am  

बहुत अच्छा लिखा है आपने ...!aajkal यही सब तो हो रहा है...

श्याम सखा 'श्याम' 24 जुलाई 2009 7:44 am  

तुम्हारी जफा पे मैं गज़लें कहूँगा
सुना है हुनर को हुनर काटता है

आपका हुनर वाकई हुनर सुखन है
श्याम सखा

अशोक कुमार पाण्डेय 24 जुलाई 2009 7:48 am  

अच्छे शेर हैं
बधाई

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह 24 जुलाई 2009 11:29 am  

Bahut umda gazal kahi aapne, bahut dino baad itni nok palak durust gazal mili.
wah ,kya baat hai .
Meri mangal kamnayen.
Aapka hee
Dr.Bhoopendra

AlbelaKhatri.com 24 जुलाई 2009 9:27 pm  

bhai bahut khoob kaha,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
badhaai !

संगीता पुरी 25 जुलाई 2009 10:41 am  

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

नारदमुनि 26 जुलाई 2009 2:28 am  

bahut sundar.narayan narayan

तशरीफ लाने का शुक्रिया

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